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फार्मासिस्ट-केमिस्ट लाइसेंस खेल : ड्रग कंट्रोलर आहूजा ने संभाला मोर्चा

चंडीगढ़ : हरियाणा में केमिस्ट-फार्मासिस्ट के बीच किराये के लाइसेंस का खेल राष्ट्रीय स्तर पर नजर में आ गया है। फार्मासिस्टों के राष्ट्रीय संगठन ड्रग अधकारियों पर गम्भीर आरोप जड़ रहे हैं। निचले अधिकारियों की लापरवाही है या नहीं, ये तो जांच की बात है, लेकिन विभाग की किरकिरी न हो, इसके लिए हरियाणा के ड्रग कंट्रोलर नरेंद्र आहूजा "विवेक" स्वयं निगरानी कर रहे हैं। बातचीत में वह इस बात से इनकार नहीं करते कि यह खेल नहीं चल रहा, मगर इसकी जड़ें कहाँ हैं, कौन सूत्रधार है, इसका पता कर शीघ्र खुलासा करने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस मामले में जानकारी जुटाने का कुछ समय चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा मामला सामने आया तो दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।  एक ही पंजीकरण पर दो-दो कारोबार होने की खबर छपने के बाद पूरे प्रदेश में हडकंप मचा हुआ है। अपनी खाल बचाने के लिए ऐसे लोग बैक डेट में त्याग पत्र देकर भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं। आकाओं के संरक्षण में चल रहे इस गोलमाल के पीछे अनेक ऐसे तथ्य छीपे हैं, जो हकीकत को उजागर कर देंगे। 
 
इस बारे में आरटीआई कार्यकर्ता विनय कुमार भारती ने कहा कि सब मिलीभगत का खेल है। इसलिए तो आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई से अधिकारी गुरेज कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक साथ दो काम करने वाले फार्मासिस्टों पर फार्मेसी प्रेक्टिस रेगुलेशन एक्ट के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि कोई भी फार्मासिस्ट अपना लाइसेंस किराये पर देकर दूसरा काम कैसे कर सकता है। यह पीपीआर 2015 का उल्लंघन है। ऐसे मामले तब संज्ञान में आते हैं, निलम्बन की कार्रवाई कर फार्मेसी कोंसिंल व राज्य औषधी नियंत्रण विभाग लीपापोती भर करता है। उन्होंने कहा कि फार्मेसी नियम 1948 के सेक्शन 42 के नियम 65/15 के तहत रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट ही दवाई दे सकता है, लेकिन इन नियमों को तार तार किया जा रहा है और लाइसेंस की आड़ में ऐसे लोग दवा विक्रेता का काम करते हैं, जिन्हें किसी प्रकार का औषधी ज्ञान नहीं है।
 
हरियाणा फार्मासिस्ट संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश सहरोत से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि फार्मासिस्ट द्वारा लाइसेंस किराये पर देना व साथ में दूसरा काम करना कानूनी जुर्म है। उन्होंने कहा कि जब फार्मासिस्ट लाइसेंस लेता है तो वह शपथ पत्र देता है कि वह कोई दूसरा काम नहीं करता। आठ घंटे अपने लाइसेंसी प्रतिष्ठान पर रोजाना गुजारेगा। यदि इन नियमों का उल्लंघन होता है तो शपथ की शर्त पूरी ना करने पर धारा 420, फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने पर धारा 467,468 व 471  व शपथ पत्र गलत देने पर 120बी के तहत कार्रवाई भी बनती है। यदि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने में अधिकारी उदासीनता दिखाते हैं तो उनके खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा 166 के तहत कर्तव्य निर्वहन ना करने पर कार्रवाई भी बनती है। उन्होंने कहा कि यदि पूरे मामले पर गहनता से नजर डालें तो इस सारे प्रकरण में ८० प्रतिशत दोषी औषधी नियंत्रण विभाग है, जबकि 20 प्रतिशत दोष की भागीदार हरियाणा फार्र्मेसी कोंसिल भी है। जब इनसे पूछा गया कि एक पंजीकरण पर दो कारोबार करने वालों के खिलाफ पंजीकरण को समाप्त करने की अवधि क्या है तो उन्होंने कहा कि जितनी गलती अधिक होगी, उतनी सजा अधिक होगी। एक वर्ष से लेकर जीवन भर तक लाइसेंस राज्य औषधी नियंत्रण विभाग रदद कर सकता है और हरियाणा फार्मेसी कोंसिल भी त्वरित कार्रवाई कर सकती है।
 
प्रकरण चर्चाओं में आने के बाद प्रदेश के रोहतक, हिसार, भिवानी, पानीपत, करनाल, फरीदाबाद, गुडगाँव  व अन्य जिलो में अनेक ऐसे लाइसेंस धारकों ने बैक डेट में त्याग पत्र दे दिए हैं जो एक साथ दो काम करते थे। भिवानी में तो चर्चा एक निजी नर्सिंग होम में तैनात चिकित्सक की भी है, जिन्होंने वर्षों से अपना लाइसेंस एक दवा दुकानदार को दे रखा था और उन्होंने अब मामला गंभीर होता देख त्याग पत्र दे दिया है। ऐसे एक नहीं अनेक मामले हैं।
 



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