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पंजीकरण एक कारोबार दो आम लोगो कि सेहत से खिलवाड़ क्यों.??? मौन क्यों है औषधि नियंत्रण विभाग

भिवानी- सरकार भले ही पारदर्शिता का राग अलापती हो, लेकिन पर्दे के पीछे जो हो रहा है वह तस्वीर भयावह है। ड्रग एंड कास्मेटिक एक्ट-1940  रूल 1945 और फार्मेसी एक्ट 1948 सेक्शन 42 के अनुसार फार्मासिस्ट ही दवा का वितरण कर सकता है, उसकी अनुपस्थिति में यह कार्य किसी भी तरह संभव नहीं है। लेकिन स्थिति यह बनी हुई है कि फार्मासिस्ट के एक पंजीकरण पर एक से अधिक लाइसेंस चल रहे हैं। ऐसे में एक फार्मासिस्ट दो जगह अपनी सेवाएं कैसे दे रहा है, सोचने का गंभीर विषय है। नियमों को ताक पर रखने वाले ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही, यह भी गंभीर सवाल है। ऐसे एक नहीं सैकडों उदाहरण हैं जहां एक फार्मासिस्ट दवा कम्पनी में काम कर रहा है और दवा की दुकान पर अपना लाइसेंस दे रखा है। प्रदेश में  80 % से अधिक दवा का कारोबार ऐसे ढर्रे पर चल रहा है लकिन लम्बे समय से इस और किसी ने ध्यान  नहीं दिया हर कोई अपने चहेतो का कारोबार ज़माने में लगा रहा। दवा की दुकान ऐसे लोग चलाते है जिन्हें दवाओं के नाम का ज्ञान भर ही है, उनके साल्ट व साइड इफैक्ट की कोई जानकारी नहीं है ।हरियाणा फूड ड्रग एडमिस्ट्रेशन की साइट पर डाटा आॅनलाइन होने के बाद जो खुलासा हुआ है, वह चौकाने वाला है। इसके बाद एक पंजीकरण पर दो जगह काम करने वाले लोगों में हड़कंप मचा हुआ है।
 
 
 
 
 
 
 

फार्मासिस्ट फाउंडेशन ने हरियाणा स्टेट फार्मेसी काउंसिल को पत्र लिखकर साथ में ऐसे लोगो की सूची संलग्न की, जिन्होंने एक पंजीकरण पर दो जगह काम करने का बीड़ा उठा रखा है। ऐसे फार्मासिस्ट जो एक पंजीकरण पर दो जगह काम कर रहे हैं। आम आदमी की जिंदगी से भी खिलवाड़ कर रहे हैं।फार्मेसी काउंसिल ने फार्मासिस्ट फाउंडेशन की शिकायत पर क्या कार्रवाई की, यह तो अभी पता चलना बाकी है। लेकिन इस कारगुजारी में राज्य का औषधी नियंत्रण विभाग भी संदेह के घेरे में आता है। उसकी सहमति के बिना आखिर एक पंजीकरण पर दो लाइसेंस कैसे जारी हुए। यह गहन जांच का विषय भी है। यदि जमीनी हकीकत सामने आई तो जिला स्तर से राज्य स्तर के आका इस आग की जद मेें आएंगे। अगर भिवानी की बात करें तो हरियाणा फार्मेसी काउंसिल द्वारा पंजीकृत नम्बर 17571 पर दो लाइसेंस औषधी नियंत्रण विभाग द्वारा जारी किए गए। पहला लाइसेंस नम्बर 2592.ओबी/2592.बी के तहत जारी किया गया। जबकि दूसरा लाइसेंस 2662.ओबी/ 2662.बी के तहत जारी किया गया है। यह कारनामा देखकर हैरानी होती है कि भ्रष्टाचार की जड़े कितनी गहरी हैं। जब हकीकत उजागर होने लगी तो एक पंजीकरण पर दो लाइसेंस लेने वाले लोगों में हड़कंप मच गया और उन्होंने अपने आकाओं के इशारे पर बैक डेट में त्याग पत्र देकर व्यवस्था को भ्रमाने का प्रयास शुरू कर दिया।
 
एक व्यक्ति दो जगह काम नहीं कर सकता:कुशवाहा  
फार्मासिस्ट फाउंडेशन के महासचिव रजनीश कुशवाहा से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि एक पंजीकरण पर दो लाइसेंस देना ना केवल अनुचित है, बल्कि यह रोगी या आम आदमी के जीवन से खिलवाड़ भी है। एक व्यक्ति एक साथ दो जगह काम नहीं कर सकता, हमने इस बारे में सूची सहित हरियाणा फार्मेसी काउंसिल को शिकायत भेजकर कार्रवाई की मांग की है। यदि कोई कार्रवाई नहीं हुई तो फाउंडेशन प्रदर्शन करेगा और इसके बाद न्यायायलय की शरण भी लेगा। उन्होंने कहा की अगर कोई फार्मासिस्ट एक पंजीकरण पर दो काम करता है तो उनपर धारा420 के तहत केस दर्ज किया जाना चाहिए। 
 
एक पंजीकरण पर दो लाइसेंस अनुचित: वशिष्ठ
हरियाणा फार्मासिस्ट संगठन के अध्यक्ष विकास वशिष्ठ से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि फार्मासिस्टों के अधिकार के लिए संगठन संघर्ष कर रहा है। एक पंजीकरण पर दो लाइसेंस जारी करना बड़ा घालमेल है। इस मामले के तार नीचे से चंडीगढ़ तक जुड़े हैं, ऐसे दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। यदि अधिकारियों ने कार्रवाई करने में आना कानी की तो धारा 166 के तहत मामला न्यायालय में दायर किया जाएगा।
 
घालमेल में शामिल है अधिकारी: त्रिपाठी
फार्मासिस्ट फाउंडेशन के प्रदेश अध्यक्ष दीपक त्रिपाठी ने बताया कि फ़ूड एण्ड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़े अधिकारी गोलमाल में सरीक है अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है की फरीदाबाद के इसडीसीओ करण गोदारा को अनेक शिकायते देने के बावजूद उन्होंने  केवल लीपापोती कर अपने फर्ज निभा दिया है।
 
 

उनके संज्ञान में नहीं ऐसी कोई जानकारी: श्योराण
वरिष्ठ औषधि नियंत्रण अधिकारी रमन श्योराण से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि एक पंजीकरण पर दो लाइसेंस होने की जानकारी उनके संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा होगा तो नियम के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। जब उनसे पूछा गया कि सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मिलने के बाद कितने लोगों ने अपने लाइसेंस छोड़े हैं तो उन्होंने इस बारे में भी कोई जानकारी होने से इंकार कर दिया।
 
भिवानी पहुंचकर ही करेंगे स्थिति स्पष्ट: ग्रोवर
जिला औषधि नियंत्रण अधिकारी हेमंत ग्रोवर से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि वे न्यायालय में किसी मामले की तारीख के चक्कर में चंडीगढ़ आए हुए हैं। भिवानी कार्यालय में पहुंचने पर ही स्थिति स्पष्ट कर पाएंगे।
 
क्या कहते हैं एचएसपीसी के चेयरमैन कंसल
हरियाणा स्टेट फार्मेसी काउंसिल के चेयरमैन सोहनलाल कंसल से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि एक पंजीकरण पर दो लाइसेंस जारी करना अनुचित है। कुछ मामले उनके संज्ञान में भी आए हैं। जब उनसे पूछा गया कि ऐसे आरोपियों के खिलाफ किस प्रकार की कार्रवाई की जाती है तो उन्होंने कहा कि आरोपियों का पंजीकरण एक दो वर्ष के लिए सजा के तौर पर निलंबित किया जाता है। एक से अधिक बार गलती वाले पंजीकरण को पांच से सात साल के लिए भी निलंबित किया जा सकता है।
 
एक साथ दो काम करने वाले फार्मासिस्ट के खिलाफ होनी चाहिए कार्रवाही:विनय कुमार भारती 
आरटीइ एक्टिविस्ट विनय कुमार भारती का कहना है की किसी फार्मासिस्ट द्वारा लाइसेंस किराये पर देना पीपीआर-2015 का उलंघन है। उन्होंने कहा की नियमो का उलंघन करने वाले दोषी का लाइसेंस नियमित रूप से निलंबित किया जाना चाहिए जबकि फार्मेसी कौंसिल लीपापोती के लिए मात्रा 2 वर्ष के लिए लाइसेंस निलंबित कर औचारिकता पूरी करती है। उन्होंने कहा की एक साथ दोहरा कार्य करने वाले फार्मसिस्ट को दोषी मानकर उसके खिलाफ सख्त कार्रवाही की जानी चाहिए क्यूकि फार्मासिस्ट लाइसेंस किराये पर देते वक्त शपत पत्र देता है की वह बेरोजगार है और वो कोई दूसरा काम नहीं कर रहा। 



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