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180 देशों में भारत के दवा बाजार की ताकत का राज खोल गए चेयरमैन दुआ

 
नॉएडा -  भारत के दवा उत्पाद की गुणवत्ता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है की यहाँ की दवाईया विश्व के 180 देशो में एक्सपोर्ट की जाती है। इतना ही नहीं भारत अपने दवा व्यापार का करीब 30 प्रतिशत शेयर अमेरिका में निर्यात करता है । यह बात भारत सरकार कि फार्मास्यूटिकल एक्सपोर्ट्स प्रमोशन कौंसिल के चेयरमैन डॉ. दिनेश दुआ ने एमिटी यूनिवर्सिटी में आयोजित 70वी अंतरराष्ट्रीय दवा सम्मेलन में कही। उन्होंने कहा की भारत विश्व की फार्मेसी है। डॉ दुआ ने कहा की दवा बनाने के क्षेत्र में भारत 13  प्रतिशत ग्रोथ पर है जब्कि अमेरिका मात्रा 3 प्रतिशत की बढ़त पर है। उन्होंने कहा की देश के लिए यह गौरव की बात है की भारत ने पहली बार 17 बिलियन का दवा निर्यात किया है जो अंतरराष्ट्रीय सत्तर पर एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा की अफ्रीका अपने दवा आयत का 16 % अकेले भारत से करता है।  डॉ दुआ ने कहा की करीब 10 वर्षो बाद भारत का दवा व्यापार अंतरराष्ट्रीय बाजार में 200  बिलियन डॉलर का हो जाएगा यह हमारी दवाओं कि गुणवत्ता का प्रमाण है।  दवा निर्माता कंपनियों का नैतिक दायित्व है की आम लोगो तक दवाओं का लाभ पहुंचने की निति बनाए जाए ताकि देश को स्वस्थ बनाने में हम अपना रचनात्मक सहयोग कर सके। उन्होंने कहा कि भारत का 16 प्रतिशत दवा बाजार पर नैशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी का नियंत्रण है जब्कि 84 प्रतिशत बाजार में वे दवाओं की मूल्य अपेक्षा से अधिक है इस पर नियंत्रण करकर ही आम लोगो तक इसका लाभ पहुंचाया जा सकता है।  उन्होंने कहा की आयुष्मान भारत के माद्यम से भारत की दवा निर्माता कंपनियों को प्रोत्साहन मिलेगा।
 
 

फार्मास्यूटिकल एक्सपोर्ट्स प्रमोशन कौंसिल के महानिदेशक श्री उदय भास्कर ने कहा कि भारतीय दवा बाजार को विकसित के लिए अभी और गुंजाईश है। इसकी लिए हमें निति निर्धारित कर अपने उत्पादों की गुणवत्ता पर खास ध्यान देना होगा। इसके साथ साथ दवाओं के निर्माण से पहले गहन शोध भी करना होगा।उन्होंने कहा कि शेडूल ऍम सभी नियामक दिशानिर्देशों का सबसे अच्छा संयोजन है। उन्होंने कहा कि फर्माएक्सकिल ने चीन खाद्य एवं औषधि प्रशासन के साथ करार किया है कि अब भारतीय उत्पाद चीन में भी बिक सकेंगे। इस समय चीन का दवा व्यापार 125 बिलियन है जो की 2025 तक 175 बिलियन तक पहुंच सकता है । 
 
अफ्रीका हेल्थ एडवाइजर के निदेशक सौरभ सिंघल ने बताया की 2016-17 के दौरान फार्मा सेक्टर का निर्यात 2,75,852 करोड़ रुपये था जबकि वर्ष 2017-18 में जीएसटी लागू होने के बाद यह यह बढ़कर 3,03,526 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया जो की पिछले साल की तुलना में 10 प्रतिशत से भी अधिक है। उन्होंने बताया कि चालू वर्ष के लिए निर्यात आंकड़े 3,27,700 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। जो पूर्व- जीएसटी शासन की 2016-17 की तुलना में लगभग 12 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा की भारत के दवा व्यापार की पकड़ अंतरराष्ट्रीय सत्तर पर बढ़ रही है उन्होंने यह भी बताया कि औषधि अनुमोदनों की संख्या जो जीएसटी से पूर्व 2016 -17 में 7,857 थी वह जीएसटी लागू होने के बाद 2017 -18  में महत्वपूर्ण उछाल लेकर 10,446 हो गई। सिंगल ने कहा कि भारतीय उत्पादों कि क्षमता और गुणवत्ता दर्शाने के लिए भारतीय फार्माकोपिया के प्रसार पर अधिक बल दिया जाना चाहिए ।
 

फेडरेशन ऑफ़ फार्मा एन्त्रेप्रेंयूर्स  के सह-अध्यक्ष बी.आर सिकरी ने कहा कि जब-जब फार्मा को लेकर नियमो में बदलाव किया जाता है दवा उद्योगों के लिए परेशनिया पैदा हो जाती है क्योकि दवा उद्योग अपने बलबुते पर ही सक्षम बनता है सरकार कि इस उद्योग को प्रोत्साहित करने में भूमिका ना के बराबर है । नैशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी द्वारा निर्धारित दवाओं कि कीमत से आगे तो उद्योग बढ़ नहीं सकता लकिन एपीआई कि कीमते बढ़ने से कंपनियों के सामने आर्थिक संकट आ खड़ा होता है। उन्होंने कहा कि एपीआई की कीमते हर महीने बदलती रहते है तो नपीपीए द्वारा दवाओं कि निर्धारित कीमतों में भी हर महीने बदलाव किया जाना चाहिए। 

 
 



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