BREAKING NEWS:
  • Friday, 22 Feb, 2019
  • 8:15:28 PM

दवा कंपनियों की स्पेन बैठक का हैरान करने वाला सच

नई दिल्ली: कुछ माह पहले स्पेन में शुगर की दवा बेचने वाली प्रमुख कपनियों की एक बैठक हुई थी जिसमें दवाओं की बिक्री बढ़ाने के लिए सुझाव दिया गया कि अगर शरीर में सामान्य शुगर का मानक 120 से कम कर 100 कर दिया जाए तो शुगर की दवाओं की बिक्री 40 प्रतिशत बढ़ेगी।  बता दें कि पहले शरीर में सामान्य शुगर का मानक 160 था जो कि दवाओं की बिक्री के लिए इसे कम करते करते 120 तक लाया गया, जिसे आने वाले समय में 100 तक करने की संभावना है।
                एलोपैथी दवा कंपनियां (सभी नहीं) लूटने के लिए किस हद तक गिर सकते हैं ये इसका जीता जागता उदाहरण है कि आज मेडिकल साइंस के अनुसार शरीर में सामान्य शुगर का मानक 80 से 120 है। दवा निर्पमता कंपनियों के साथ मिलकर इन्होंने कुछ फर्जी शोध की आड़ में नया मानक 70 से 100 तय कर दिया। यदि एक स्वस्थ  व्यक्ति  टेस्ट करवाए और शुगर का स्तर 100 से 110 के बीच आ जाए तो डॉक्‍टर उसे शुगर का रोगी घोषित कर देगा और वो इस भय के कारण शुगर बीमारी की एलोपैथी दवाएं लेना शुरू कर देंगे जो कि पहले से ही शुगर सामा‍न्य थी। अब इस भय के साथ शुगर की दवा लेने लगेंगे जिससे इसके उल्‍टा परिणाम होगा कि आपको कमजोरी महसूस होने लगेगी। यदि दो से तीन करोड़ लोग भी इस साजिश का शिकार होते हैं तो ये दवा बनाने वाली कंपनियां लाखों करोड़ कमा लेंगे।
                 1997 से पहले फास्टिंग डायबिटीज की लिमिट 140 थी। फिर फास्टिंग शुगर की लिमिट 126 कर दी गई, जिससे विश्व जनसंख्‍या में 14 प्रतिशत डायबिटीक लोग अचानक बढ़ गए। उसके बाद 2003 में डब्‍ल्‍यूएचओ ने इसकी लिमिट कम करके 100 कर दी। अर्थात फिर से 70 प्रतिशत लोग डायबिटीज से ग्रस्त माने जाने लगे। दरअसल डायबिटीज लिमिट तय करने वाली कुछ दवा कंपनियां थी जो डब्‍ल्‍यूएचओ के साथ मिलीभगत करके अपना मुनाफा बढ़ाने के लिए कर रही थी। क्या आप जानते हैं कि डायबिटीज की जांच कैसे होती है या आप डायबिटीज के शिकार हैं भी या नहीं?
डायबिटीज चेक करने का एक सरल उपाय है – आप की उम्र और + 100। जैसे यदि आपकी उम्र 65 है तो आपका शुगर लेवल खाने के बाद 165 होना चाहिए। यदि आपकी उम्र 75 है तो आपका नॉर्मल शुगर लेवल खाने के बाद 175 होना चाहिए।  यदि ऐसा होता है तो आपको डायबिटीज नहीं है, लेकिन  
ड्ब्ल्यूएचओ को अपने कॉन्फिडेंस में लेकर बहुत सारी फार्मा कंपनियों ने अपने व्‍यापार के लिए शुगर लेवल में उथल पुथल कर दी और आम जनता उस चक्रव्‍यूह में फंस गई।.....
मुकेश श्रीराम की वाल से



Responses

Related News

इंडिया फार्मा 2019 में खुला राज- फार्मास्युटिकल क्षेत्र को 3 लाख करोड़ का बाजार बनाने में जुटा रसायन मंत्रालय

इंडिया फार्मा 2019 में खुला राज- फार्मास्युटिकल क्षेत्र को 3 लाख करोड़ का बाजार बनाने में जुटा रसायन मंत्रालय

केन्‍द्रीय रसायन और उर्वरक, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्री, डीवी सदानंद गौड़ा ने कहा कि भारत उच्च गुणवत्ता वाली जन औषधियों के विनिर्माण में शीर्ष स्‍थान पर बरकरार है। सरकार का ध्यान सभी के लिए सस्‍ती स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में सुधार लाने पर केंद्रित है। सरकार दुनिया में सबसे बड़े सरकारी वित्त पोषित स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम ‘आयुष्‍मान भारत’ में योगदान पर ध्‍यान दे रही है। श्री गोड़ा आज बेंगलुरू में ‘फार्मास्युटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेस’ के बारे में भारत के सबसे बड़े वैश्विक सम्मेलन के चौथे संस्करण के उद्घाटन के अवसर पर संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर केंद्रीय रसायन और उर्वरक सड़क परिवहन और राजमार्ग, नौवहन राज्य मंत्री, श्री मनसुख एल मंडाविया भी उपस्थित थे। इस सम्मेलन में रूस, केन्या, ब्रिटेन, मलेशिया, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और उजबेकिस्तान सहित लगभग 30 से अधिक देशों के ड्रग नियामकों ने भाग लिया। इसके अलावा, इस आयोजन में पूरे देश के 15 राज्यों के ड्रग नियामकों की भागीदारी भी देखी गई। भारत सरकार और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और फार्मास्युटिकल और चिकित्‍सा उपकरण क्षेत्र के उद्योग जगत के दिग्गज भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

फार्मासिस्ट-केमिस्ट लाइसेंस खेल : ड्रग कंट्रोलर आहूजा ने संभाला मोर्चा

फार्मासिस्ट-केमिस्ट लाइसेंस खेल : ड्रग कंट्रोलर आहूजा ने संभाला मोर्चा

हरियाणा में केमिस्ट-फार्मासिस्ट के बीच किराये के लाइसेंस का खेल राष्ट्रीय स्तर पर नजर में आ गया है। फार्मासिस्टों के राष्ट्रीय संगठन ड्रग अधकारियों पर गम्भीर आरोप जड़ रहे हैं। निचले अधिकारियों की लापरवाही है या नहीं, ये तो जांच की बात है, लेकिन विभाग की किरकिरी न हो, इसके लिए हरियाणा के ड्रग कंट्रोलर नरेंद्र आहूजा "विवेक" स्वयं निगरानी कर रहे हैं। बातचीत में वह इस बात से इनकार नहीं करते कि यह खेल नहीं चल रहा, मगर इसकी जड़ें कहाँ हैं, कौन सूत्रधार है, इसका पता कर शीघ्र खुलासा करने का दावा किया है।

पंजीकरण एक कारोबार दो आम लोगो कि सेहत से खिलवाड़ क्यों.???  मौन क्यों है औषधि नियंत्रण विभाग

पंजीकरण एक कारोबार दो आम लोगो कि सेहत से खिलवाड़ क्यों.??? मौन क्यों है औषधि नियंत्रण विभाग

सरकार भले ही पारदर्शिता का राग अलापती हो, लेकिन पर्दे के पीछे जो हो रहा है वह तस्वीर भयावह है। ड्रग एंड कास्मेटिक एक्ट-1940 रूल 1945 और फार्मेसी एक्ट 1948 सेक्शन 42 के अनुसार फार्मासिस्ट ही दवा का वितरण कर सकता है, उसकी अनुपस्थिति में यह कार्य किसी भी तरह संभव नहीं है। लेकिन स्थिति यह बनी हुई है कि फार्मासिस्ट के एक पंजीकरण पर एक से अधिक लाइसेंस चल रहे हैं। ऐसे में एक फार्मासिस्ट दो जगह अपनी सेवाएं कैसे दे रहा है, सोचने का गंभीर विषय है। नियमों को ताक पर रखने वाले ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही, यह भी गंभीर सवाल है। ऐसे एक नहीं सैकडों उदाहरण हैं जहां एक फार्मासिस्ट दवा कम्पनी में काम कर रहा है

180 देशों में भारत के दवा बाजार की ताकत का राज  खोल गए चेयरमैन दुआ

180 देशों में भारत के दवा बाजार की ताकत का राज खोल गए चेयरमैन दुआ

भारत के दवा उत्पाद की गुणवत्ता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है की यहाँ की दवाईया विश्व के 180 देशो में एक्सपोर्ट की जाती है। इतना ही नहीं भारत अपने दवा व्यापार का करीब 30 प्रतिशत शेयर अमेरिका में निर्यात करता है । यह बात भारत सरकार कि फार्मास्यूटिकल एक्सपोर्ट्स प्रमोशन कौंसिल के चेयरमैन डॉ. दिनेश दुआ ने एमिटी यूनिवर्सिटी में आयोजित 70वी अंतरराष्ट्रीय दवा सम्मेलन में कही। उन्होंने कहा की भारत विश्व की फार्मेसी है। डॉ दुआ ने कहा की दवा बनाने के क्षेत्र में भारत 13 प्रतिशत ग्रोथ पर है जब्कि अमेरिका मात्रा 3 प्रतिशत की बढ़त पर है। उन्होंने कहा की देश के लिए यह गौरव की बात है की भारत ने पहली बार 17 बिलियन का दवा निर्यात किया है जो अंतरराष्ट्रीय सत्तर पर एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा की अफ्रीका अपने दवा आयत का 16 % अकेले भारत से करता है।