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छत्तीसगढ़ में नर्सों का उत्पीड़न, जेल में नर्सें

वैसे तो महिलाओं को अपना घर- परिवार बहुत प्यारा होता है, जिनके बिना रहना उन्हें बिलकुल मंजूर नही है किंतु छत्तीसगढ़ की सरकारी अस्पताल में कार्यरत नर्सों की ऐसी कौनसी जरूरत है जो उन्हें अपना घर- परिवार छोड़कर रायपुर के ईदगाह भाठा मैदान में 45℃ की तपती गर्मी में बैठने पर मजबूर कर रही है।
         नर्सें जिन्हें सादगी और सेवाभाव की प्रतिमूर्ति कहा जाता है, मरीजों की सेवा ही जिनका धर्म है, उनका छत्तीसगढ़ शासन द्वारा लगातार शोषण किया जा रहा है। जिसके विरोध में छत्तीसगढ़ के नर्सों द्वारा 18/5/18 से आंदोलन किया जा रहा है जिसका आज 14वाँ दिन है। इन नर्सों में कई ऐसी महिलाएं हैं जिनके बच्चे अभी छोटे हैं और उन्हें माँ के साथ की जरूरत हैकिन्तु शासन की बेरुखी के कारण उन्हें तपती गर्मी में खुले मैदान में अपना दिन काटने पर मजबूर होना पड़ा है।
        छत्तीसगढ़ की नर्सों का यहाँ के शासन द्वारा हमेशा से उपेक्षा किया जा रहा है। डब्लू एच ओ के मापदंड के अनुसार 8 मरीजों के लिए 1 नर्स की आवश्यक्ता होती है किंतु यहाँ पर 30 से 40 मरीजों के लिए 1 नर्स की पोस्टिंग की जाती है जो बहुत ही दयनीय स्थिति है। अन्य राज्यों में स्टाफ नर्सों को 4600 ग्रेड पे दिया जाता है किंतु हमारे छत्तीसगढ़ में 2800 के लगभग आधे वेतन पर कार्य कराया जाता है। यहाँ के नर्सों द्वारा नर्सिंग कैडर के ग्रेड 2 की मांग की गई है जो अन्य राज्यों में प्राप्त है। केंद्र तथा अन्य राज्यों में स्टाफ नर्स के पदनाम में परिवर्तन कर नर्सिंग ऑफिसर किया गया है जिसका आदेश छत्तीसगढ़ शासन को बहुत पहले मिल चुका है किंतु यहाँ की शासन शायद नये पदनाम से खुश नही है इसलिए पदनाम में परिवर्तन नही कर रही है। अन्य राज्यों में दिए जाने वाले वेतन और भत्तों से छतीसगढ़ में दिए जाने वाले वेतन बहुत कम है। जब इस विषय में शासन से गुहार लगाई गई तो उनके अधिकारी द्वारा दो टूक में जवाब दिया गया कि जहाँ ज्यादा वेतन मिल रहा है वहाँ चले जाओ। एक तरफ शासन पलायन रोकने की बात करती है और उनके अधिकारी ऐसा जवाब देकर पलायन को बढ़ावा दे रहे हैं। लगातार 3 सालों तक शासन से गुहार लगाने पर अपना हक नही मिलने से परेशांन छत्तीसगढ़ की नर्सेस अपनी सेवाओं पर रोक लगाकर,हक की प्राप्ति हेतु आंदोलन करने पर मजबूर हैं।
      आखिर बेटी बचाओ - बेटी पढ़ाओ, महिला शसक्तीकरण आदि की दुहाई देने वाली शासन को इन नर्सेस की मांगों को पूरा करने में कहाँ दिक्कत हो रही है। शायद शासन को लगता है कि महिलाएं कमजोर होती है इसलिए कम वेतन देकर कार्य करवाने पर अड़ी हुई है जबकि हमारा संविधान समान कार्य समान वेतन की तरफदारी करता है। हमारी यही दुआ है कि छत्तीसग शासन इन बेटियों की मांग जल्द से जल्द पूरा करें।



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