BREAKING NEWS:
  • Tuesday, 16 Oct, 2018
  • 8:01:18 AM

भारत और डेनमार्क के बीच खाद्य सुरक्षा और सहयोग समझौता ज्ञापन को मंत्रिमंडल की मंजूरी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और डेनमार्क के बीच खाद्य सुरक्षा और सहयोग समझौता ज्ञापन को अपनी पूर्वव्‍यापी (एक्‍सपोस्‍ट फेक्‍टो) मंजूरी प्रदान कर दी है। भारत और डेनमार्क के बीच इस समझौता ज्ञापन पर 16 अप्रैल, 2018 को हस्‍ताक्षर किए गये थे।
 
समझौता के लाभ
इस समझौता ज्ञापन से खाद्य सुरक्षा की दिशा में दोनों देशों को अपनी क्षमता निर्माण को सुदृढ़ बनाने और खाद्य सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को तेजी से सुलझाने तथा द्विपक्षीय सहयोग के मजबूत होने, पारस्‍परिक समझबूझ एवं विश्‍वास कायम करने में मदद मिलेगी।
 
इस समझौता ज्ञापन से सर्वोत्‍तम व्‍यवसायों तक पहुंच और खाद्य व्‍यापार में महत्‍वपूर्ण वस्‍तुओं के खाद्य सुरक्षा मानकों के सुधार में मदद मिलेगी।



Responses

Related News

अब जनऔषधि केंद्रों पर 2.50 रुपए में मिलेगा सैनिटरी नेपकिन

अब जनऔषधि केंद्रों पर 2.50 रुपए में मिलेगा सैनिटरी नेपकिन

केन्‍द्रीय रसायन एवं उवर्रक, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, जहाजरानी राज्‍य मंत्री मनसुख एल. मंडाविया ने प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के त‍हत पर्यावरण अनुकूल सैनिटरी नैपकिन ‘जनऔषधि सुविधा’ की शुरूआत की। अब किफायती सैनिटरी नैपकिन देशभर में 33 राज्‍यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों के 3600 से अधिक जनऔषधि केन्द्रों पर उपलब्‍ध होगी। केन्‍द्रीय रसायन एवं उवर्रक तथा संसदीय मामलों के मंत्री श्री अनंत कुमार ने विश्‍व महिला दिवस 8 मार्च, 2018 को किफायती दर पर सैनिटरी नैपकिन उपलब्‍ध कराने का वादा किया था।

उपलब्धि: प्रसव के दौरान बची 12000 माताओं की जिंदगी

उपलब्धि: प्रसव के दौरान बची 12000 माताओं की जिंदगी

‘2012 की तुलना में 2015 (मध्‍य वर्ष) में हमने लगभग 12000 माताओं का जीवन बचाया है। पहले प्रसव के दौरान हर वर्ष 44000 माताओं की मृत्‍यु हो जाती थी, लेकिन अब यह आंकड़ा घटकर केवल 32000 के स्‍तर पर आ गया है।’ यह बात केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने यहां सरकार की 48 महीनों की उपलब्धियों को रेखांकित करने के लिए आयोजित संवाददाता सम्‍मेलन में कही। श्री नड्डा ने कहा कि देश में 2013 से मातृ मृत्‍यु दर (एमएमआर) में रिकॉर्ड 22 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जो पहले की तुलना में अब तक की एमएमआर में कमी का सबसे अधिक प्रतिशत है। श्री नड्डा ने कहा, ‘भारत ने 2015 तक 130 शिशुओं को जीवित पैदा कराने में सफलता हासिल कर 139 प्रति लाख जीवित शिशुओं के जन्‍म के एमएमआर के सहस्राब्‍दी विकास लक्ष्‍य (एमडीजी) को हासिल किया है। इस दर से हम 2030 की लक्षित समय सीमा से पहले 2022 तक 70 का सतत विकास लक्ष्‍य (एसडीजी) को हासिल कर लेंगे।’

14000 करोड़ की सस्ती दवा और 2.38 लाख रोगियों को मुफ्त डायलिसिस का दावा

14000 करोड़ की सस्ती दवा और 2.38 लाख रोगियों को मुफ्त डायलिसिस का दावा

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बताया कि स्वास्थ्य क्षेत्र को गति देने के लिए कि शीघ्र ही 14 राज्यों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होंगे। साथ ही 1.5 लाख प्राथमिक उपचार केंद्रों तथा उप-केंद्रों को स्वास्थ्य एवं देखभाल केंद्रों में बदला जाएगा। इसके तहत इस वर्ष 19000 ऐसे केंद्रों को स्वीकृति दी जा चुकी है। सम्मेलन को संबोधित करते हुए नड्डा ने बताया कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को पूरी छूट दी है कि वे अपनी सुविधा के अनुसार स्वास्थ्य प्रणाली का संचालन करें। साथ ही केंद्र राज्यों को वित्तीय सहयोग देने के लिए तैयार है। नड्डा ने बताया कि पिछले 3 वर्षों में फ्री ड्रग और डायग्नोस्टिक सेवा पहल के तहत 14000 करोड़ रुपए की दवाइयों का वितरण हुआ है। प्रधानमंत्री नेशनल डायलिसिस कार्यक्रम का 2.38 लाख रोगियों को फायदा मिला है। अमृत केंद्रों पर बाजार दर से 60-90 फीसदी कम कीमत पर दवाइयां प्रदान की जा रही हैं। इनमें कैंसर और हृदय संबंधी जैसे रोगों की दवाइयां भी शामिल हैं। अबतक इन केंद्रों से रोगियों को कुल 346.59 करोड़ रुपए का फायदा पहुंचा है।

छत्तीसगढ़ में नर्सों का उत्पीड़न, जेल में नर्सें

छत्तीसगढ़ में नर्सों का उत्पीड़न, जेल में नर्सें

वैसे तो महिलाओं को अपना घर- परिवार बहुत प्यारा होता है, जिनके बिना रहना उन्हें बिलकुल मंजूर नही है किंतु छत्तीसगढ़ की सरकारी अस्पताल में कार्यरत नर्सों की ऐसी कौनसी जरूरत है जो उन्हें अपना घर- परिवार छोड़कर रायपुर के ईदगाह भाठा मैदान में 45℃ की तपती गर्मी में बैठने पर मजबूर कर रही है। नर्सें जिन्हें सादगी और सेवाभाव की प्रतिमूर्ति कहा जाता है, मरीजों की सेवा ही जिनका धर्म है, उनका छत्तीसगढ़ शासन द्वारा लगातार शोषण किया जा रहा है। जिसके विरोध में छत्तीसगढ़ के नर्सों द्वारा 18/5/18 से आंदोलन किया जा रहा है जिसका आज 14वाँ दिन है। इन नर्सों में कई ऐसी महिलाएं हैं जिनके बच्चे अभी छोटे हैं और उन्हें माँ के साथ की जरूरत हैकिन्तु शासन की बेरुखी के कारण उन्हें तपती गर्मी में खुले मैदान में अपना दिन काटने पर मजबूर होना पड़ा है।