• Tuesday, 22 May, 2018
  • 1:14:00 PM

पिता से 10 हजार रुपए उधार लेकर शुरू की थी कंपनी, अब हैं 'फार्मा किंग'

कोलकाता में फार्मा होलसेलर के तौर पर कामकाज शुरू करने वाले दिलीप संघवी ने सन फार्मा का गठन 1983 में किया. सिर्फ 5 लोगों और 5 दवाओं के साथ पहला प्लांट लगाने वाली सन फार्मा का मार्केट कैप 2.10 लाख करोड़ रुपए के पार निकल गया है. कंपनी की सालाना बिक्री 4.2 अरब डॉलर है. पिछले दो सालों में सन फार्मा ने प्रतिस्पर्धी फार्मा कंपनी रैनबैक्सी समेत करीब 13 कंपनियों का अधिग्रहण किया है. अपने समकालीनों के उलट सांघवी हमेशा अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहे हैं. जब विदेश में उपक्रम लगाने की बारी आई तो उन्होंने केवल अमेरिकी बाजार पर ध्यान दिया, जो दुनिया का बड़ा दवा बाजार है. निवेशकों ने इसे सराहा.

 

घाटे में चल रही कंपनियों को मुनाफे में बदलने में माहिर
1955 में मुंबई में जन्मे दिलीप संघवी को घाटे में चल रही कंपनियों को खरीदकर उनकी काया पलटने के लिए जाना जाता है. दिलीप संघवी हमेशा कंपनी को सस्ते में खरीदने में विश्वास रखते हैं. कंपनी ने पहला सौदा 1987 में किया. लंबी सौदेबाजी के बाद अमेरिका की कैरको फार्मा दिलीप संघवी की पहली बड़ी खरीद थी. ये सौदा 5 करोड़ डॉलर में हुआ. इसके बाद दिलीप संघवी ने अमेरिका में ही दो और कंपनियों वैलिएंट और एबल फार्मा को खरीदा. घाटे में चल रही इन फार्मा कंपनियों की आज सन फार्मा की आमदनी में बड़ी हिस्सेदारी है.

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